Gurudev Siyag Siddha Yoga (GSSY)

‘गुरुदेव सियाग सिद्धयोग’ में आपका स्वागत हैं।

       गुरुदेव सियाग सिद्धयोग, मंत्र जप व ध्यान पर आधारित एक अद्भुत योग है। यह योग (सिद्धयोग) नाथमत के योगियों की देन है। इसमें सभी प्रकार के योग जैसे भक्तियोग, कर्मयोग, राजयोग, क्रियायोग, ज्ञानयोग, लययोग, भावयोग, हठयोग आदि सम्मिलित हैं, इसीलिए इसे सिद्धयोग या महायोग भी कहते हैं। सिद्धयोग में वर्णित शक्तिपात दीक्षा द्वारा कुण्डलिनी जागरण से साधक के त्रिविध ताप आदि-दैहिक (Physical), आदि-भौतिक (Mental) व आदि-दैविक (Spiritual) नष्ट हो जाते हैं तथा साधक जीवन मुक्त हो जाता है। समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग सिद्धयोग को मूर्तरूप दे रहे हैं।

      सद्गुरुदेव सियाग से दीक्षित साधकों को सघन मंत्र जप व नियमित ध्यान से भौतिक जीवन की सभी प्रकार की समस्याओं, शारीरिक व मानसिक रोगों तथा नशों से सहज में मुक्ति मिल रही है। विद्यार्थियों की एकाग्रता व याद्दाश्त में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। भौतिक विज्ञान ने वर्तमान में जितना विकास किया है, उससे आगे का विकास इस सिद्धयोग आराधना द्वारा किया जाना संभव है। यदि विश्व के वैज्ञानिक विश्व ब्रह्माण्ड की असंख्य समस्याओं व अनसुलझी पहेलियों को हल करना चाहें तो ध्यान और समाधि अवस्था में संबंधित समस्याओं का हल होना संभव है। मनुष्य ईश्वर की सर्वोच्च कृति है, उसमें असीम ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत भण्डार भरा पड़ा है। इस सिद्धयोग से अपने भीतर की चेतना को जाग्रत कर उसका सदुपयोग लिया जा सकता है। 
मनुष्य के पूर्ण विकास का नाम ही ईश्वर है। मनुष्य, जीवन की सभी समस्याओं, रोगों तथा नशों से मुक्त होता हुआ, अपने असली स्वरुप अर्थात् ईश्वर के  तद्रूप कैसे हो सकता है? गुरुदेव सियाग सिद्धयोग में, मनुष्य शरीर रूपी सुन्दर ग्रंथ को पढ़ने का एक दिव्य विज्ञान, एक सरल और सहज तरीका है-मंत्र जप और ध्यान। प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या? सद्गुरुदेव सियाग की दिव्य वाणी में संजीवनी मंत्र जप के साथ, इनकी तस्वीर से 15 मिनट ध्यान करके देखें!

 सद्गुरुदेव सियाग की तस्वीर से ही क्यों लगता है-‘ध्यान’?   इस सत्य को जानने के लिए, ध्यान करके देखें!

       गुरुदेव सियाग को सगुण साकार एवं निर्गुण निराकार की सिद्धि हो गई, इसी कारण से गुरुदेव की तस्वीर से ध्यान लगता है और सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान होता है। महर्षि श्री अरविन्द के अनुसार किसी व्यक्ति को ये दोनों सिद्धियाँ यदि एक ही जीवन में, एक ही आदमी में हो जाए तो मानव मात्र का कल्याण हो जाएगा। यही कारण है कि गुरुदेव की तस्वीर से ध्यान लगता है।
गुरुदेव का उद्देश्य है, – ‘‘मानवता में सतोगुण का उत्थान और तमोगुण का पतन करने संसार में अकेला ही निकल पड़ा हूँ। मुझ पर किसी भी जाति-विशेष, धर्म-विशेष तथा देश-विशेष का एकाधिकार नही है।’’             

      संपूर्ण मानव जाति को सिद्धयोग दर्शन से लाभान्वित करने हेतु समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग ने अपने कर कमलों से गुरुवार, 25 दिसम्बर 1997 को क्रिसमिश के दिन इस वेबसाईट www.the-comforter.org की शुरूआत की थी। इस वेबसाइट में सद्गुरुदेव सियाग के मिशन की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।

ध्यान कैसे करें ?

  • गुरुदेव सियाग सिद्धयोग आराधना की एक सरल विधि है। इसमें दो कार्य करने होते हैं। सघन नाम (मंत्र) जप व नियमित ध्यान।
  • आरामदायक स्थिति में बैठकर थोड़ी देर के लिए गुरुदेव के चित्र को एकाग्रता से, खुली आँखों से देखें। फिर आँखें बंद करके समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के चित्र को अपने आज्ञाचक्र पर (जहाँ बिन्दी या तिलक लगाते हैं) केन्द्रित कर, गुरुदेव से 15 मिनट के लिए ध्यान स्थिर करने की करूण प्रार्थना करें।
  • अब गुरुदेव द्वारा दिये गए संजीवनी मंत्र का मानसिक रूप से सघन जप करें (बिना होंठ-जीभ हिलाए)। नाम जप ही ध्यान की चाबी (Key) है। इसको तेल की धार की तरह, हर समय (Round the Clock) सघन मंत्र जप करें।

दिव्य मंत्र प्राप्त करें

रोग मुक्ति।

गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के सिद्धयोग की देन शक्तिपात दीक्षा द्वारा कुण्डलिनी जागरण से,
सभी प्रकार के शारीरिक व मानसिक रोगों तथा नशों से पूर्ण मुक्ति संभव।

Badrinarayan Jodhpur AIDS

एड्स से मुक्ति​

मैं बद्रीनारायण पुत्र श्री जोरारामजी, मुझे कई दिनों तक बुखार आने पर दिनांक 13.09.2001 को डाॅ. सी. पी. माथुर को दिखाया व खून टेस्ट करवाया तो एच.आई.वी. पाॅजीटिव बताया। डाॅक्टर ने जो दवाईयाँ दी वो लेता रहा। लेकिन बीमारी ठीक नहीं हुई व निरन्तर स्वास्थ्य गिरता गया व बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया। पूरे शरीर में गांठे हो गई व शरीर पूरा बुरी तरह से सूज गया।

Rameshwar Prasad PNG

कैंसर से मुक्ति

मेरा नाम रामेश्वर प्रसाद हैं, मैं एक ट्रक ड्राईवर हूँ। मुझे मार्च 2011 में गर्दन में दर्द महसूस हुआ। उस समय मैं गुजरात में था। मेरा दर्द धीरे-धीरे बढ़ गया और गाड़ी चलाना मुश्किल हो गया। मैंने SMS हाॅस्पिटल जयपुर में डाॅक्टरों को दिखाया तो उन्होंने कैंसर घोशित (Declare) कर दिया और मेरी रिपोर्ट जाँच के लिए मुम्बई भेज दी। वहाँ से कैंसर की रिपोर्ट की पुष्टि हो गई

हीमोफीलिया से मुक्ति

श्रीमती सुनीता व घनश्याम चौधरी बताते है कि हमारा बेटा हेमन्त जो अभी 11 वर्ष का है। इसके जन्म से ही हीमोफीलिया (जिसमें चोट लगने पर खून का थक्का नहीं जमता व खून लगातार बहता रहता है उस बीमारी को चिकित्सा विज्ञान में हीमोफीलिया कहते हैं।) बीमारी थी।

फोटो गैलेरी

मुख्यालय - अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर

  • अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर
    होटल लेरिया के पास चौपासनी, जोधपुर (राजस्थान) भारत - 342 003
  • +91 291 2753699
  • +91 9784742595
  • avsk@the-comforter.org

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