Gurudev Siyag Siddha Yoga (GSSY)

सन् 1982 की बात है। मेरे दांत में दर्द रहता था। डाॅक्टर से जाँच कराने पर बोले कि दांत निकालना पड़ेगा। दांत निकलवाते समय टूट गया और एक टुकड़ा अंदर रह गया। मुझे दर्द एवं उच्च रक्त चाप था। डाॅक्टर को दिखाने पर उन्होंने दर्द निवारक इन्जेक्शन दिये। धीरे-धीरे इन्जेक्शन की मात्रा बढ़ती गई एवं मुझे फिर आदत पड़ गई।

मैं रोज 15-15 इंजेक्शन लेने लगा जो कि मुझसे छूटने मुश्किल हो गये। यदि कभी नहीं लेता तो बदन में असहनीय दर्द होने लगता था। इस प्रकार मैं धीरे-धीरे इन इन्जेक्शनों का का आदी हो गया।

फिर किसी के कहने से मैं हेरोइन के इंजेक्शन लेने लग गया। मेरे परिवार वालों को यह लगने लगा कि अब इसकी मौत शीघ्र निश्चित है।

मेरी बहन को गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के दर्शन की जानकारी थी। उसने कहीं से इनकी महिमा सुन रखी थी। वह मुझे गुरुदेव के श्री चरणों में ले आई।

परम पूज्य गुरुदेव से मैंने 1988 में दीक्षा ली। दीक्षा के बाद गुरुदेव द्वारा बताये मंत्र का सघन जप और नियमित सुबह-शाम खाली पेट 15-15 मिनट ध्यान करने लगा। इससे शीघ्र ही नशे के इंजेक्शन छूट गये। उच्च रक्तचाप भी ठीक हो गया। अब मैं पूर्णतया ठीक हूँ।

मेडिकल विज्ञान इस पर शायद विश्वास न करे लेकिन मैं उदाहरण के रूप में आप सबके समक्ष हूँ। अब मैं शारीरिक व मानसिक रूप से भी पूर्ण रूप से स्वस्थ हूँ। मेरा ऐसा मत है कि यह एक दिव्य एवं पूर्ण विज्ञान है। समस्त मानव जाति को इसकी आवश्यकता है।

-रणवीर सिंह सैनी
पुत्र श्री प्यारेलाल सैनी
गाँव-किराड़ा
हिसार (हरियाणा)
संदर्भ-सवितादेव संदेश  अखबार  सन् 1995

नाम जप से अद्भुत परिवर्तन आता है और आज तक लाखों लोग संजीवनी मंत्र से लाभान्वित हो चुके हैं।

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