Gurudev Siyag Siddha Yoga (GSSY)

घुटनों का आॅपरेशन टला, पैर कटने से बच गये।

मेरा नाम रामभरोसे यादव है, तहसील-राजगढ़, जिला-अलवर का रहने वाला हूँ। मैं यहाँ जोधपुर में सन् 1980 से रेलवे में कार्यरत हूँ। अचानक मेरे जीवन में कुछ दुःखद दिन आए और  सन् 2007 के आस-पास मेरे दाएं पैर के घुटने में दर्द होने लगा तथा पैर घुटने से मुड़ना बंद हो गया, पैर सीधा ही रहता था। मुड़ता बिल्कुल भी नहीं था। ऐसा हुआ जैसे किसी ने लोहे के तार को सीधा करके वैल्डिंग कर दिया हो। मैं लगभग छः महिने तक चारपाई पर पड़ा रहा। बहुत दुःखी था। असहनीय दर्द होता था।

       मैंने जोधपुर के लगभग सारे डाॅक्टरों को दिखा दिया। जिनको भी दिखाया, उन्होंने अपने अपने हिसाब से दवाईयों बदल बदल कर दी लेकिन कोई आराम नहीं मिला।

       जहाँ भी कहीं से सुन लिया वहीं इलाज कराने पहुँच जाता था। इसी कड़ी में अजमेर के एक डाॅक्टर को दिखाया तो उन्होंने जाँच करने के बाद दवाईयाँ दी और कहा कि यह दवाईयाँ लो इससे कुछ फायदा होता है तो ठीक, नहीं तो पैर का आॅपरेशन होगा।  हो सकता है पैर ठीक भी हो जाये और नहीं तो फिर पैर काटना पड़ेगा और एक पैर काटा तो कुछ समय बाद दूसरा भी काटना पड़ सकता है। तकरीबन एक लाख रूपये से भी ज्यादा की दवाईयाँ खाने के उपरान्त भी मेरे पैर में थोड़ा-सा भी फायदा नहीं हुआ।

       फिर मैंने देशी आयुर्वेदिक दवाईयाँ भी ली, परन्तु उससे भी कोई आराम नहीं मिला।

       फिर मैंने मेरी बच्ची के मामा ससुर डाॅ. शिवलाल यादव जो दिल्ली एम्स हाॅस्पीटल में हड्डी के विषेशज्ञ डाॅक्टर हैं, उनको रिपोर्ट दिखाई तो उन्होंने कहा कि इसका तो आॅपरेशन ही करना पड़ेगा, खर्चा तो काफी आएगा परन्तु आॅपरेशन करवा देंगे, आप यहाँ आ जाओ। मैंने पूछा कि ‘‘खर्चा कितना आएगा?’’ तो उन्होंने कहा ‘‘लगभग 5-6 लाख रुपये लग जाएंगे।’’ उस हिसाब से मैंने दिल्ली जाने के लिए टेªन का टिकट रिजर्वेशन करा लिया था।

       यह बात मैंने गंगाराम जी को बताई जो मेरी जान पहचान में है तथा जोधपुर में ही नौकरी करते हैं तो उन्होंने कहा ‘‘ठीक है दिल्ली तो बाद में जाना ही है, उससे पहले मेरी एक राय है कि कल गुरुवार के दिन अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर में सद्गुरुदेव श्री रामलालजी सियाग का विशाल कार्यक्रम है, वहाँ चलते हैं, हो सकता है गुुरुदेव की कृपा से आपका पैर ठीक हो जाए!’’  तो  मैंने कहा ‘‘गंगाराम जी जब डाॅक्टरों ने आॅपरेशन का बोला है तो गुरु जी के पास में ऐसा क्या है? जो मेरा पैर ठीक कर देंगे।’’ मैंने उनकी बात को टालना चाहा परन्तु वे माने नहीं।  उन्होंने कहा ‘‘आप एक बार मेरे कहने से टिकट रद्द  करा दो। मैंने कहा ‘‘ मैं चल नहीं सकता, मुझे वहाँ ले जाएगा कौन?’’ तो उन्होंने कहा  ‘‘मैं आपको रिक्शे मैं बिठा कर ले जाऊँगा, इसकी आप चिंता मत करो।’’ दूसरे दिन श्री गंगाराम जी मुझे कार्यक्रम में ले गए। वहाँ जा कर देखा तो पूरा मैदान जनता से खचाखच भरा हुआ था। मैंने गंगाराम जी से कहा कि यहाँ इतनी भीड़ में अपना नम्बर कब लगेगा? चलो वापस चलते हैं, क्योंकि मैं सोच रहा था कि गुरुजी कान में कोई मंत्र फूूँकेंगे। उन्होंने कहा कि ‘‘नहीं, यहाँ ज्यादा समय नहीं लगेगा, गुरुदेव सबको एक साथ माइक से मंत्र सुनाएंगे। आप यहाँ तक आए हैं तो थोड़ा विश्वास और धैर्य से बैठ जाइए। तो मैं, मेरा बेटा व गंगाराम जी हम तीनों वहाँ बैठ गये।

       थोड़ी देर बाद माइक से घोषणा हुई कि गुरुदेव पधार रहे हैं। मैंने उधर देखा तो बिल्डींग की दूसरी मंजिल से गुरुेदव आते हुए दिखे। ज्योंही मैंने गुरुदेव को देखा तो मुझे ऐसा लगा कि ‘‘साक्षात् भगवान्, आसमान से धरती पर उतर रहे हैं और मेरे अंदर असीम शांति महसूस हुई।’’ मेरे अंदर जो वापस जाने की इच्छा थी, वह एकदम से खत्म हो गई। प्रथम दर्शन में ही मन में एक नीरवता व शांति का एहसास हुआ। गुरुदेव आकर आसान पर बैठे। सिद्धयोग दर्शन की जानकारी दी, मंत्र सुनाया और कहा कि ‘‘इस मंत्र का सघन जप करो और मेरी तस्वीर का ध्यान करो, चाहे कैसी भी बीमारी हो? ठीक हो जाएगी।’’

       इसके बाद पन्द्रह मिनट का ध्यान करने का बोला तो सबने आँखें बंद कर ध्यान शुरू किया। ज्योंही ध्यान शुरू किया, कई साधकों को यौगिक क्रियाएँ होने लगी। कोई जोर-जोर से हंस रहा है, तो कोई रो रहा है, किसी को प्रणायाम हो रहा है तो किसी को शीर्षासन लग गया, सबको अलग-अलग तरह की यौगिक क्रियाएँ स्वतः ही होने लगी। मेरे लिए ये सब कौतुहल ही था। ऐसा कभी देखा नहीं था। इतने में मेरे पास बैठे मेरे बच्चे के ध्यान लग गया और वह गुलाटियाँ खाने लग गया तो मैं देखने लग गया और मुझे डर लगने लगा कि मेरे बेटे को क्या हो गया? मैंने गंगारामजी से कहा कि ‘आप हमारे को कहाँ भूत खाने में ले आये? एक तो समस्या पहले थी ही, एक मेरे बेटे के गड़बड़ और हो गई, यहाँ से जल्दी निकलो।’ उस यौगिक क्रिया को देखकर, पहले जो नीरवता व शांति का एहसास हुआ था उसको मैं भय के कारण अचानक भूल गया। तो उन्होंने हमारे को रोक लिया और बोले कि आप थोड़ा धीरज रखो, कोई गड़बड़ नहीं होगा। थोड़ी देर बाद जैसे ही गुरुदेव ने बोला कि पन्द्रह मिनट का समय पूरा हो गया है, आँखें खोल दो तो सब शांत हो गये और पहले जैसी स्थिति में वापस आ गए। उसके बाद गुरुदेव ने बोला कि ‘‘जहाँ बैठे हो नमस्कार करो और पधारो।’’ उसके बाद गुरुदेव वापस अपने शयनकक्ष में चले गए।

       इसके बाद सबने गुरुदेव के सिद्धासन को छूकर नमन् किया और जाने लगे। फिर हमने गुरुदेव की तस्वीर ली और घर आ गये। इसके बाद बीमारी को लेकर जो मन में मुझे चिंता थी व खत्म हो गई। मुझे विश्वास हो गया कि अब मेरी बीमारी ठीक हो सकती है। सात-आठ दिन तक मैं मंत्र जप व ध्यान करता रहा, परन्तु मेरा ध्यान लगा नहीं।

       उन्हीं दिनों में मुझे रेलवे आॅफिस से काॅल आया कि 60 दिन की ट्रेनिंग के लिए आपको उदयपुर जाना होगा, क्योंकि मैं पिछले छह महिने से घर पर ही पड़ा था, ड्यूटी पर गया नहीं था। दीक्षा लेने के नवें दिन मुझे उदयपुर जाना था। उसी दिन शाम को 9ः00 बजे के आस-पास मैं नहा-धोकर तैयार हो गया क्योंकि मेरे 11ः00 बजे की बस थी। मैंने मेरे बेटे से कहा कि मुझे बस में बैठा देना, मैं चला जाऊँगा। रवाना होने से पहले मैंने सोचा कि अभी समय तो पड़ा ही है, थोड़ा ध्यान कर लूँ। गुरुदेव की तस्वीर के सामने पैर सीधा रख कर बैठा और ध्यान करने लगा, जैसे ही ध्यान शुरू किया, मेरा ध्यान लग गया और मैं अचानक सीधा खड़ा हो गया। ‘‘मेरे पैर में जोरदार झटका लगा और पैर सीधा हो गया।’’ मेरे पैर में से घुटने से लेकर एड़ी से होता हुआ एक आग का गोला-सा निकल गया। मेरे पैर में जो असहनीय दर्द था, वह सारा गायब हो गया।

       मैं जोर-जोर से कूदने-नाचने लग गया और मैं क्या देखता हूँ कि ‘भगवान् श्री कृष्ण मेरे सामने, ऊपर की तरफ बंशी बजाते हुए नाच रहे हैं।’ मैंने उनसे कहा भगवान् आओ-आओ-मेरे पास आओ, आपको मेरे पास आना ही पड़ेगा, वह सामने बंशी बजाते हुए नाच रहे हैं किन्तु पास नहीं आवें। बाद में मेरे बार-बार पुकारने पर वह मेरे पास आए और मेरे सीने में घुस गए। इसके बाद मैंने भगवान् शंकर की तस्वीर, जो मेरे घर में लगी थी, की तरफ हाथ से इशारा करते हुए पुकारा-आओ-आओ शंकर मेरे पास आओ, आपको मेरे पास आना ही पड़ेगा, तब भगवान् शंकर तस्वीर में से निकल कर मेरे सिर में घुस गये। फिर गुरुदेव व दादागुरुदेव (बाबा गंगाईनाथ जी योगी) आये और दोनों ही मेेरे दाएं और बाएं कंधों पर बैठ गये। मेरी जीभ स्वतः ही उलट कर तालु में धंस गई और खे़चरी मुद्रा लग गई, ऊपर से रस (अमृत) टपकने लगा। उस रस का स्वाद इतना मधुर था कि ऐसा स्वाद बाहर किसी भी चीज में नहीं है। मैं उस रस को चूसने लगा जिससे मेरे मुँह से जोर-जोर से सी…..सी….सी…. की आवाज निकले लगी।

       मेरा मंत्र जप रुक गया और वह एक धुन में बदल गया। मेरे बच्चे पास में चिल्लाने लगे कि पापा आपका तो कल्याण हो गया, आपका पैर गुरुदेव ने ठीक कर दिया।

       उसके बाद मेरा पैर बिल्कुल ठीक हो गया, आज तक कभी भी दर्द नहीं हुआ, मेरे को हजारों रुपये की दवाईयाँ फेंकनी पड़ी क्योंकि दवाईयाँ मेरे कोई काम की नहीं थी। मुझे समझ में नहीं आता ये डाॅक्टर लोग क्या करते है? जो बीमारी लाखों रूपये की दवाईयों से ठीक नहीं होती है, वह गुरुदेव ने एक मंत्र के माध्यम से पूरी तरह से खत्म कर दी। अब मैं हर समय गुरुदेव द्वारा बताए गये संजीवनी मंत्र का जप करता रहता हूँ और सुबह-शाम पन्द्रह मिनट गुरुदेव की तस्वीर का ध्यान करता हूँ। मेरे परिवार के सभी सदस्यों ने उसी समय गुरुदेव से मंत्र दीक्षा ले ली थी। मेरा पूरा परिवार आनन्द मय जीवन जी रहा है। मैं अब भी ट्रेन चलाता हूँ और लोगों को गुरुदेव के दर्शन की जानाकारी देता रहता हूँ।  मेरे सारे कार्य गुरुदेव की कृपा से सफल होते हैं।

       -सद्गुरुदेव भगवान् की ऐसी करूण कृपा हुई कि मेरा नारकीय जीवन सुखद और स्वस्थ्य, आनंदमय जीवन बन गया।

       -यदि मैं दिल्ली में आॅपरेशन करवाता और सफल नहीं होता तो पैर कट सकता था। एक या दोनों ही कट सकते थे लेकिन गुरुदेव की असीम कृपा से, मैं पूर्ण स्वस्थ हो गया और अंग भंग भी नहीं हुआ।

       -डाॅक्टरों ने बोला था कि आॅपरेशन में 5-6 लाख का खर्चा आएगा, वह मेरा पूरा का पूरा बच गया। छवनी भी नहीं लगी।

       -अद्भुत सिद्धयोग से पूर्णतः स्वस्थ होने के बाद में, मैंने सारी दवाईयाँ और मेडिकल रिपोट्र्स फाड़कर फेंक दी। अब मैं समझ रहा हूँ कि यदि मेरे पास मेडिकल रिपोर्ट्स होती तो दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा सबूत होता लेकिन मैं जीता-जागता सबूत दुनिया के सामने खड़ा हूँ और गुरुदेव की असीम कृपा से मंत्र जप और ध्यान से पूर्णतः स्वस्थ हुआ हूँ।

       एक और कैंसर रोगी की घटना है। एक क्रिश्चियन औरत उसका नाम रुख्मणीदेवी है। रेलवे में हैड क्लर्क के पद पर थी। उनको गले का कैंसर हो गया था। उनको तीन बार मुम्बई के बाॅम्बे हाॅस्पीटल में दिखाया और दवाईयाँ ली परन्तु कोई राहत नहीं मिली। डाॅक्टरों ने कहा कि अब यह छह महिने से ज्यादा नहीं जी सकती है। घर ले जाकर सेवा करो। किसी गार्ड ने मुझे उनके बारे में बताया तो मैं उनको गुरुदेव के आश्रम में ले आया। उन्होंने गुरुदेव से मंत्र दीक्षा लेकर मंत्र जप व ध्यान किया। उसकी स्थिति ऐसी थी कि देख नहीं सकते थे। गला सूज कर बहुत बड़ा हो गया था।  वह सघन मंत्र जप व नियमित ध्यान से ठीक हो गई और पाँच-छह साल नौकरी करने के बाद, अब सेवानिवृत्त हुई है।

       अब उनका गुरुदेव के प्रति क्या भाव है? वो ही जाने लेकिन कभी-कभी  मंत्र जप और ध्यान के बारे में पूछता हूँ तो उनका गार्ड पति कहता है कि वह ध्यान कर रही है। आज वह पूर्णरूप से स्वस्थ है। ‘‘सिद्धयोग ने कैंसर को मार दिया। कैंसर से वो नहीं मरी।’’ ऐसा अद्भुत ज्ञान मनुष्य मात्र के लिए है, जो श्रद्धा से झुक गया उसका कल्याण निश्चित है। ‘‘यह एक मानवीय धर्म है’’ जो सद्गुरुदेव अपने प्रवचन में हमेंशा कहते थे वो पूर्णतः प्रत्यक्षीकरण के साथ सत्य और परम सत्य है।

       इसलिए मैं स्पिरिचुअल सांइस पत्रिका के माध्यम से मानव मात्र को यही राय देना चाहता हूँ कि आप सद्गुरुदेव श्री रामलालजी सियाग द्वारा बताए गए संजीवनी मंत्र का जप व उनकी तस्वीर का ध्यान करो, आपका जीवन धन्य हो जाएगा। मैंने कभी गुरु धारण करने की नहीं सोची थी, परन्तु मुझे तो साक्षात् परमात्मा, सद्गुरुदेव के रूप में मिल गए। ऐसे परम पूज्य सद्गुरुदेव भगवान् को मेरा अनन्त कोटि प्रणाम। जय गुरुदेव।

-रामभरोसे यादव (56 वर्ष)
तहसील- राजगढ़
जिला-अलवर (राज.)

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