Gurudev Siyag Siddha Yoga (GSSY)

क्या निर्जीव चित्र सजीव पर प्रभाव डाल सकता है? प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या? सद्गुरुदेव सियाग की दिव्य वाणी में संजीवनी मंत्र सुनकर, उनके चित्र पर 15 मिनट ध्यान करके देखें!

       सर्वप्रथम हमारे घर से मेरे बड़े भाई साहब दीक्षित हुए थे। जब वो ध्यान करते तो उनके चेहरे पर दिन भर छाए रहने वाले नशे के कारण हम इसका विरोध करते थे। कभी-कभी उनको ध्यान में योग होता था। दिनांक 28 सितम्बर 1993 को रात्रि लगभग 9 बजे जब भाईसाहब अपने कमरे में ध्यान करने हेतु जा रहे थे तो उन्होंने मुझे भी ध्यान करने के लिए कहा।

मैं चूंकि पढ़ाई कर रही थी। अतः मैंने मजाक-मजाक में टाल दिया। फिर कुछ देर पश्चात् सोचा, ध्यान लगाने में क्या हर्ज है? कौनसा ध्यान लग ही जायेगा। क्यों न भाई साहब का कहना मान लूं। अतः मैं चुपचाप उनके कमरे में जाकर उनके पास ही गुरुदेव की फोटो के सम्मुख बैठ गई। आँखें बन्द करके गुरु-गुरु का मानसिक जाप करने लगी। कुछ ही देर बाद मुझे महसूस हुआ कि रीढ़ की हड्डी में से होकर कोई शक्ति करंट की भांति ऊपर की ओर उठ रही है, इसके साथ ही रीढ़ की हड्डी में झटके लगने लगे, कट कट की आवाज आने लगी और कमर एकदम सीधी हो गई। दोनों हाथों में खिंचाव हुआ, जिसके कारण लटके हुए हाथ एकदम सीधे हो गये। हाथों में भी कन्धों से षुरू होकर हथेलियों की ओर कई झटके लगे और हाथ सीधे हो गए।

मैंने रोकने का विफल प्रयास किया परन्तु मेरे बस में कुछ न था। मुझे इतनी अजीबोगरीब अनुभूति हो रही थी कि सोचने का समय भी नहीं मिला। यानि विचार शुन्यता की सी स्थिति थी। फिर गर्दन में खिंचाव होने लगा, गर्दन सीधी होकर पीछे की ओर मुड़ने लगी और मेरा शरीर भी पीछे की ओर मुड़ने लगा। मुझे लगा की कोई शक्ति मुझे पीछे की ओर धकेल कर, मेरी कोई विशिष्ट मुद्रा करवाना चाहती है। पैर सहज आसन की स्थिति में ही रहे व सिर जमीन पर पीछे की ओर मुड़ा हुआ ही टिक गया। और अचानक कहाँ से मुझमें इतने रुदन भाव उमड़ पड़े कि मैं सिसकिया लेने लगी व कुछ देर में उग्र रूप से रोने लगी। यह सिलसिला करीब 4-5 मिनट तक चला, तब तक भाई साहब अपना ध्यान समाप्त कर उठ चुके थे व रोने-चिल्लाने के कारण घर के सभी सदस्य भी उसी कमरे में एकत्र हो गये।

भाई साहब ने मेरी स्थिति देखकर मुझे गुरु का जाप बन्द करने को कहा व सिर सहलाया तो मेरा ध्यान भंग हुआ। तब तक आँखें ऐसी बन्द थी जैसे कि चिपका दी गई हो। जब मैंने आँखे खोली तो मेरी आँखें भी अत्यधिक लाल थी और घर से सभी सदस्यों को मेरे इर्दगिर्द एकत्र देखकर मेरी बड़ी विचित्र स्थिति थी। मैं स्वयं भाई साहब के समक्ष बड़ी लज्जित थी कि सदैव उनका मजाक उड़ाया करती थी और आज मैं स्वयं गुरु शक्ति को साक्षात् अनुभव में ले चुकी थी। खैर, फिर भी पारिवारिक माहोल व मेरी पढ़ाई के कारण मैंने लगभग 6-7 माह तक दीक्षा नहीं ली परन्तु यदा-कदा अब भाई साहब के साथ ध्यान अवश्य कर लेती थी। ध्यान में कभी-कभी योग होता था। शरीर में हल्कापन आ जाता था व खुमारी बनी रहती थी।

आखिर शादी के बाद जुलाई माह 1994 में प्रताप स्कूल जोधपुर में, मैंने व मेरे पति जो कि आयुर्वेद डाॅक्टर है, दोनों ने सदगुरुदेव से दीक्षा ली। उनको भी दीक्षा के  प्रथम दिन में ही गर्दन की कसरत होने लग गई थी। आज हम दोनों प्रसन्नचित है और नियमित ध्यान लगाते हैं। घर-गृहस्थी के  रोजमर्रा के कामकाज यथावत रूप से चलायमान है।

लाभ- मेरा ध्यान लगाने की जिज्ञासा बनने का कारण मुझे हमेषा तेज सिरदर्द होता था, तब पढ़ाई छोड़कर कमरे में अंधेरा कर, मैं सो जाया करती थी। डाॅक्टर से दवाइयाँ भी ली थी। आँखें भी सामान्य थी। ध्यान करने के बाद से मुझे सिरदर्द कभी-कभी ही होता है, पूर्व में लगभग रोजाना ही सिरदर्द हो जाया करता था।

अनुभूतियाँ- मुझे भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पूर्वाभास होता है। एक बार जब हम उदयपुर घूमने हेतु गए थे तो वहाँ ध्यान में मुझे, जोधपुर में भूकंप आया है, ऐसा दृश्य दिखाई दिया। परिवार के सदस्य दिखाई दिए व सभी (हिलते-डुलते) व कुछ पानी भी पिया था। दो दिन बाद ही अखबार में समाचार पढ़े जिसमें उल्लेख था कि जोधपुर मंे भूकंप का हल्का झटका कुछ सैकण्ड तक  रहा।

उसके कुछ दिन पश्चात् ही मुझे खूब लाशों के ढेर दिखे व कुछ लोग उन लाशों को रौंदकर जा रहे थे इतना मार्मिक दृष्य था कि मेरा ध्यान भी टूट गया। उसके लगभग 2-3 दिन पश्चात् ही राजस्थान पत्रिका में रूवांडा में नरसंहार की बड़ी-बड़ी हेडलाइन में न्यूज थी। यह प्रसंग मैंने मेरे पति को भी बतलाया, अतः वे भी आश्चर्यचकित हुए।

अब मैं, ध्यान सोते समय करती हूँ। सोते-सोते भी तन्द्रा सी बनी रहती है। कुछ दिनों पहले ही मुझे सम्पूर्ण आसमान पर श्रीकृश्ण भगवान् छाए हुए दिखे। वे सम्पूर्ण दुनिया को कुछ उपदेश दे रहे थे, परन्तु मुझे स्पष्ट सुनाई नहीं दिया।

– श्रीमती नीलमसिंह राजपुरोहित
शास्त्री नगर, जोधपुर
संदर्भ-सवितादेव संदेश से
अंक-दिसम्बर 2018

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