Gurudev Siyag Siddha Yoga (GSSY)

ध्यान की विधि : -

शक्तिपात एक महाविज्ञान है जिसके द्वारा सिद्धगुरु अपनी दिव्य शक्ति को शिष्य में सीधे संप्रेषित कर उसकी सुषुप्त शक्ति कुण्डलिनी को जागृत करते हैं। गुरु शिष्य परम्परा में चार प्रकार से शक्तिपात दीक्षा का विधान है। स्पर्श द्वारा, दृष्टि द्वारा, संकल्प दीक्षा व शब्द (मंत्र) द्वारा । गुरुदेव संजीवनी मंत्र द्वारा साधकों को शक्तिपात दीक्षा देते हैं। ये चेतन मंत्र है। इसमें प्राण-प्रतिष्ठा की हुई है। इसमें असंख्य ऋषियों की कमाई है। जो गुरु दीक्षा देता है उनकी आवाज में शक्ति होती है। 

‘‘ईश्वर प्रत्यक्ष-अनुभूति एवं साक्षात्कार का विषय है, कथा-प्रवचन का नहीं।’’

  • आरामदायक स्थिति में बैठकर थोड़ी देर के लिए गुरुदेव के चित्र को एकाग्रता से देखें।
  • फिर आँखें बंद करके समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग के चित्र को अपने आज्ञाचक्र पर (जहाँ बिन्दी या तिलक लगाते हैं) केन्द्रित कर, गुरुदेव से 15 मिनट के लिए ध्यान स्थिर करने की करूण प्रार्थना करें।
  • अब गुरुदेव को आज्ञाचक्र पर देखते हुए और साथ ही संजीवनी मंत्र का मानसिक रूप से जाप करते हुए (बिना होंठ-जीभ हिलाए)। ध्यान करें।
  •  नाम जप ही ध्यान की चाबी (key) है। इसको तेल की धार की तरह, हर समय जपें।
  • इस दौरान कोई भी यौगिक क्रिया (आसन, बंध, मुद्रा या प्राणायाम) हो तो घबराएँ नहीं तथा न ही इन्हें रोकने का प्रयास करें।ये क्रियाएँ शारीरिक विकारों को ठीक करने के लिए होती हैं। ध्यान की अवधि पूर्ण होते ही सामान्य स्थिति हो जाएगी।
  • इस विधि से सुबह-शाम खाली पेट नियमित रूप से (केवल 15 मिनट) ध्यान करते रहें।
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