Gurudev Siyag Siddha Yoga (GSSY)

ऐ वी एस के का स्वरुप

अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर – उद्देश्य

  •  विश्व के समस्त धर्मों के विकारों एवं आडम्बरों से मानव मात्र को मुक्त करना एवं अध्यात्म के मूलभूत सार्वभौम सिद्धान्त के अनुसार ‘‘मन मन्दिर’’ में उस परमतत्व की प्रत्यक्षानुभूति एवं साक्षात्कार कराना।      
  •       समस्त विश्व के मानवों के कल्याण हेतु बिना किसी वर्ग, वर्ण, जाति, धर्म, राष्ट्रीयता एवं लिंग भेद के इस दिव्य ‘‘अध्यात्म ज्ञान’’ का प्रचार एवं प्रसार करना एवं समस्त विश्व में अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र स्थापित करना।     
  •       विश्व भर में वैदिक दर्शन की प्रत्यक्षानुभूति एवं साक्षात्कार करवा कर भौतिक जगत् में विज्ञान की तरह सत्य प्रमाणित करना।      
  •       विश्व कल्याण हेतु सम्पूर्ण विश्व में वैदिक मनोविज्ञान (अध्यात्म विज्ञान) की शिक्षा हेतु प्रबन्ध करना तथा वहीं के लोगों को इस ज्ञान का प्रशिक्षण देने योग्य बनाना।      
  •       विश्व के सभी सकारात्मक स्त्री-पुरुषों को शक्तिपात दीक्षा देकर चेतन करना तथा उन्हें अपने ही देश में इस ज्ञान के प्रचार-प्रसार का अधिकार देकर मानव शान्ति का पथ प्रशस्त करना।      
  •       सिद्धयोग में वर्णित ‘‘शक्तिपात दीक्षा’’ द्वारा मानवीय गुणों में परिवर्तन लाया जाकर तमोगुण से रजोगुण, रजोगुण से सतोगुण, सतोगुण से ‘‘त्रिगुणातीत’’जाति में बदलकर उस परमतत्व की प्रत्यक्षानुभूति एवं साक्षात्कार कराना।

        अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर शुद्ध रूप से एक धार्मिक संस्था है, जिसकी स्थापना सन् 1993 में की गई (पंजीयन संख्या-09, दिनांक 10.5.1993, जोधपुर) जो राजस्थान सरकार (भारत) के देवस्थान विभाग में रजिस्टर्ड संस्था है। इस संस्था के संस्थापक व संरक्षक प्रवृत्तिमार्गी समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग है। संस्था का प्रधान कार्यालय-चौपासनी, जोधपुर, राजस्थान में स्थित है। सद्गुरुदेव सियाग द्वारा संचालित सिद्धयोग में वर्णित शक्तिपात दीक्षा में मंत्र जप व ध्यान से, भारतीय वैदिक दर्शन में वर्णित काश्मीरी शैव दर्शन व महर्षि पातंजलि योग दर्शन में वर्णित अष्टांग योग मानव जाति में मूर्तरूप ले रहा है। अध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र, जोधपुर का उद्देश्य है-संपूर्ण मानव जाति का त्रिगुणातीत जाति में दिव्य रूपान्तरण।
       सद्गुरुदेव सियाग से दीक्षित साधकों को सघन मंत्र जप व नियमित ध्यान से भौतिक जीवन की सभी प्रकार की समस्याओं, शारीरिक व मानसिक रोगों तथा नशों से सहज में मुक्ति मिल रही है। विद्यार्थियों की एकाग्रता व याद्दाश्त में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। भौतिक विज्ञान ने वर्तमान में जितना विकास किया है, उससे आगे का विकास इस सिद्धयोग आराधना द्वारा किया जाना संभव है। यदि विश्व के वैज्ञानिक विश्व ब्रह्माण्ड की असंख्य समस्याओं व अनसुलझी पहेलियों को हल करना चाहें तो ध्यान और समाधि अवस्था में संबंधित समस्याओं का हल होना संभव है। मनुष्य ईश्वर की सर्वोच्च कृति है, उसमें असीम ज्ञान और विज्ञान का अद्भुत भण्डार भरा प़ड़ा है। इस सिद्धयोग से अपने भीतर की चेतना को जाग्रत कर उसका सदुपयोग लिया जा सकता है।
मनुष्य के पूर्ण विकास का नाम ही ईश्वर है। मनुष्य, जीवन की सभी समस्याओं, रोगों तथा नशों से मुक्त होता हुआ अपने असली स्वरुप अर्थात् ईश्वर के  तद्रूप कैसे हो सकता है? गुरुदेव सियाग सिद्धयोग में मनुष्य जीवन की इस विकट पहेली को समझने का एक सरल और सहज तरीका है-मंत्र जप और ध्यान। प्रत्यक्ष को प्रमाण क्या? सद्गुरुदेव सियाग की दिव्य वाणी में संजीवनी मंत्र जप के साथ, इनकी तस्वीर से 15 मिनट ध्यान करके देखें!

       सद्गुरुदेव सियाग की तस्वीर से ही क्यों लगता है-‘ध्यान’? इस सत्य को जानो और ध्यान करके देखो!
महर्षि श्री अरविन्द ने कहा था कि ‘‘आगामी मानव जाति दिव्य शरीर धारण करेगी।’’ यह उक्ति सद्गुरुदेव सियाग द्वारा संचालित सिद्धयोग से मानव जाति में मूर्तरूप ले रही है। सद्गुरुदेव सियाग का सिद्धयोग पूर्णतः निःशुल्क है।
       संपूर्ण मानव जाति को सिद्धयोग दर्शन से लाभान्वित करने हेतु समर्थ सद्गुरुदेव श्री रामलाल जी सियाग ने अपने कर कमलों से गुरुवार, 25 दिसम्बर 1997 को ईसामसीह के जन्म दिन अर्थात् क्रिसमिश के दिन इस वेबसाईट www.the-comforter.org की शुरूआत की थी। इस वेबसाइट में सद्गुरुदेव सियाग के मिशन की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।

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