Gurudev Siyag Siddha Yoga (GSSY)

मीराबाई पर जहर का असर न होना-एक प्रमाणित सत्य

       जोधपुर में पिछले 3-4 वर्षों से गुरुदेव के समय-समय पर शक्तिपात दीक्षा कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। दिसम्बर 1992 में मेरे एक साथी के विशेष आग्रह पर एवं गुरुदेव द्वारा दीक्षा लेने से सभी नशों से छुटकारा हो जाता है यह जानकर मैं शिविर में गया, चूंकि मैं करीब 15-16 वर्षों से अफीम का सेवन कर रहा था और हालत ये थी कि अफीम मेरी सेहत का सेवन करने लगी थी। घर में अशांति का माहौल बना हुआ था। मुझे लगा कि शायद मेरी समस्या का वहाँ समाधान हो जाए।

मैं प्रतिदिन करीब चार या पाँच ग्राम रोजाना अफीम का सेवन करता था। कभी-कभी इससे भी अधिक हो जाता था।

मैंने दीक्षा दिसम्बर 1992 में ही ली थी। परन्तु गुरुदेव में सहज ही विश्वास व श्रद्धा न बना पाया अतः लगभग एक-आध वर्ष तक मुझे ध्यान में कुछ विशेष अनुभव न होता था परन्तु ध्यान लगता था। लोगोें में त्वरित गति से आने वाला बदलाव मुझे ध्यान नियमित लगाने के लिए सदैव प्रेरित करता रहता था। मैंने यह निश्चय कर लिया कि यदि वास्तव में सच्चाई है तो मुझे भी देर सवेर इस नशे से अवश्य निजात मिलेगी। सितम्बर 1994 से मुझे ध्यान के दौरान यौगिक क्रियाएं होना शुरु हुई। स्वतः ही सारे ही शरीर की नशों का खिंचाव होना, गर्दन का गोल घूमना, स्वांस का ऊपर खींच जाना, पेट नाभि से लगना आदि। मेरी खुशी का ठिकाना न था। ध्यान के दौरान अब मुझे नशा (खुमारी) आने लगा। इस खुमारी के कारण मैं जो अफीम की डोज लेता था उसका असर कम होने लगा परन्तु मन में भय था कि यदि अफीम लेना बन्द कर दिया तो मर जाऊँगा। मेरा शरीर भी दुबला पतला ही था।

मेरी स्थिति के बारे में, मैंने गुरुदेव से जिक्र किया तो उन्होंने कहा-भँवर तुम्हे इस लत को नहीं छोड़ना है यह अफीम ही एक दिन तुझे छोड़ जाएगा। तू हमेशा की तरह लेता रह।

इधर मुझे नशा न आता था। अतः मैंने अफीम की मात्रा दो-तीन गुणा बढ़ा दी यहाँ तक कि एक दिन 25 ग्राम अफीम ले ली परन्तु आश्चर्य यह था कि शरीर में असर ही नहीं, हाँ, ध्यान जरूर नियमित रूप से चालू था। दो-तीन दिन 25 ग्राम ली होगी। फिर मुझे उल्टी होने लगी, जी मचलाने लगा तब घृणा वश 2 नवम्बर 1994 को छोड़ी। आज लगभग 6-7 माह गुजर चुके हैं जब कि मैं पूर्णरूप से स्वस्थ हूँ और बिना नशे के, बैचेनी के कोई लक्षण नहीं हैं। अब अफीम के नशे की जगह संजीवनी मंत्र जप का नशा, हर समय चढ़ा रहता है।

शक्तिपात दीक्षा के उपरान्त आने वाला यह बदलाव विज्ञान के लिए खुली चुनौती है कि अफीम की डोज आदमी को दी जाए और उसे नषा नहीं आए। सबसे महत्वपूर्ण तो मुझे लगता है कि प्रकृति ने मुझे माध्यम बनाकर यह प्रमाणित कर दिया हैं कि हमारे राजस्थान में कृष्ण भक्त ‘मीरा’ ने जो कृष्ण के नाम पर ‘जहर का प्याला’ पिया था और उस पर उसका कोई असर नहीं हुआ। 25 ग्राम एक दिन में अफीम सेवन जहर नहीं तो और क्या है?

कलियुग में वापस श्री कृष्ण ही गुरुदेव के रूप में प्रकट होकर मानवता को सत् पथ पर ले जा रहे हैं।

नाम – भंवरलाल चैधरी
जिला-नागौर, (राज.)

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