GSSY - Guru Siyag's Siddha Yoga

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जी एस एस वाई के आम फायदे

किसी भी प्रकार कि शारीरिक बीमारी जैसे- एड्स, केंसर, अस्थमा, ब्लड प्रेशर, आर्थराइटिस, शुगर, हेमोफीलिया आदि से मुक्ति सम्भव.
किसी भी प्रकार की लत जैसे – ड्रग्स, शराब, अल्कोहल, बीडी, सिगरेट, पान, गुटका – तम्बाकू आदि से बिना परेशानी छुटकारा सम्भव.
किसी भी प्रकार के मानसिक चिंता, डिप्रेशन, तनाव या बीमारी से मुक्ति सम्भव.
चिंता जैसे- पारिवारिक, नौकरी, शादी, शिक्षा आदि जैसी समस्यायों से छुटकारा.
व्यक्तित्व का विकास, आत्मविश्वास एवं याद्दाश्त में अभूतपूर्व वृद्धि
विद्यार्थियों की छिपी हुई क्षमतायें सामने आती हैं.

दुनियाँ भर में बडे शहरों तथा छोटे कस्बों में रहने वाले अनगिनत लोग तनावपूर्ण जीवन जीते हुए किसी ऐसी सर्वरोगनाशक औषधि की तलाश में रहते हैं जो उन्हें तनाव तथा सभी प्रकार की बीमारियों से, जिन पर वर्तमान औषधियाँ काम नहीं करती, छुटकारा दिला सके।
कुछ लोग सनातन सत्य तथा परमात्मा की हार्दिक तलाश में हैं। इसमें से बहुत से लोग अपने इच्छित लक्ष्य की प्राप्ति हेतु योग अपनाते हैं। कुछ समय बाद धीरे-धीरे उनका उत्साह कमजोर पडना आरम्भ हो जाता है क्योंकि उनमें से अधिकांश यह जान जाते हैं कि या तो समय की कमी या फिर कार्य के अनियमित घन्टे होने के कारण रोजाना योग के थका देने वाले खानपान व रहन सहन संबंधी नियम अधिक समय तक बनाये रखना आसान नहीं है।

i इसके अलावा योग की विभिन्न क्रियाऐं जैसे आसन, बन्ध ,मुद्रायें, प्राणायाम आदि बहुत से लोगों के लिये करना आसान नहीं हैं, अधिकांश केसज में गुरू अथवा योगा टीचर की निगरानी के बिना आरम्भ में योग की मुद्रायें करने का परामर्श नहीं दिया जाता है। जिनके पास समय व धन की कमी है उनके लिये योग की कक्षाओं में जाना या तो अव्यवहारिक होता है या अधिक खर्चीला होता है। क्या इसका यह मतलब है कि योग जनसाधारण के लिये नहीं है? जिनके पास या तो समय की कमी है या जो साधन सम्पन्न नहीं हैं, जो नियमानुसार योग के प्रशिक्षण में पहुँच सकें। सामान्यतः उत्तर होगा, हाँ योग सबके लिये सम्भव नहीं है।

गुरू सियाग एक ऐसे आध्यात्मिक गुरू हैं जो अपने शिष्यों के लिये जिम में जाये बिना या घर पर योग के थका देने वाले गहन प्रशिक्षणों के किये बिना ही सिद्धयोग के द्वारा योग के सर्वोत्तम लाभ उपलब्ध करा देते हैं। सिद्धयोग में, एक इच्छुक व्यक्ति को गुरू सियाग से दीक्षा लेनी होती है तथा उनके बताये अनुसार ध्यान एवं मंत्रजाप करना होता है। हमारा शरीर एक माध्यम है जिसके द्वारा ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। इसीलिये वैदिक दर्शन, साधकों के लिये जो आध्यात्मिकता के पथ पर आगे बढना चाहते हैं, पूर्ण स्वस्थ होने की आवश्यकता पर बल देता है। दैनिक जीवन के एक उदाहरण से यह बात स्पष्ट की जा सकती है। मान लो हमें ’अ‘ स्थान से ’ब‘ स्थान तक की यात्रा करनी है।अगर वाहन चालू व बिलकुल ठीक हालत में है तो वह स्थान ’ब‘ तक हमें जल्दी और सुविधापूर्वक पहुँचायेगा बजाय उस वाहन के जो बुरी हालत में है। संक्षेप में, आध्यात्मिक प्रगति के लिये पूर्ण रूप से स्वस्थ होना पहली आवश्यकता है। सिद्धयोग का नियमित अभ्यास ठीक यही करता है वह हमें सबसे पहले पूर्ण रूप से स्वस्थ करता है।